प्रेरक प्रसंग - 2
शिक्षक का पेशा बहुत पवित्र तथा ईमानदारी वाला होता है! आज का प्रेरक प्रसंग उन सभी शिक्षकों को समर्पित है जो अपना सबकुछ त्यागकर देश के भविष्य को संवारने में लगे हैं। एक बार बाल गंगाधर अपने कुछ मित्रों के साथ बात कर रहे थे। उन दिनों उन्होंने वकालत पास की थी। एक मित्र बोला, ‘तिलक, वकालत तो तुमने पास कर ली है। किंतु आगे के लिए क्या सोचा है? क्या अब सरकारी नौकरी करोगे याकिसी कोर्ट कचहरी में वकालत?’ मित्र की बात सुनकर तिलक बोले,’अब तुमने पूछ ही लिया है तो सुन लो। मुझे ऐसे पैसे की जरूरत नहीं जो मुझे सरकार का गुलाम बना कर रखे। मैं ऐसी वकालत नहीं करना चाहता जहां दिन में कई बार झूठ बोलना पड़े।’ बात आई-गई हो गई। सभी अपने-अपने कामों में लग गए। एक दिन उनकी मित्र-मंडली को पता चला कि बाल गंगाधर ने एक स्कूल में पढ़ाना शुरू कर दिया है।तनख्खाह है तीस रुपए महीना।यह सुनकर उस मित्र को सबसे ज्यादा आश्चर्य हुआ जिसने कुछ समय पूर्व उनका मन जानना चाहा था। वह सीधे तिलक के पास जा पहुंचा और बोला, ‘यह तुमने क्या किया तिलक? वकालत की डिग्री लेकर अध्यापक क्यों बने? क्या तुम शिक्षकों की आर्थिक स्थिति के बा...