एक शरीर में कितने दो हैं

एक शरीर में कितने दो हैं?

गिन के देखो कितने दो हैं?


देखने वाली आँखें दो हैं

उनके ऊपर भौहें दो हैं

सूंघते हैं खुशबू जिनसे

नाक तो इक है, नथुने दो हैं

एक शरीर में कितने दो हैं


भाषाएँ हैं सैकड़ों लेकिन

बोलने वाले होंठ तो दो हैं

लाखों आवाज़ें हैं सुनते जिनसे

सुनने वाले कान तो दो हैं

एक शरीर में कितने दो हैं


कान भी दो, आंखें भी दो

दाएं बाएं कंधे भी दो हैं

दो बांहें, दो कुहनियां उनकी

हाथ भी दो, अंगूठे भी तो दो हैं

एक शरीर में कितने दो हैं


दो हाथों की दो हैं कलाइयाँ

टाँगे दो हैं, घुटने दो हैं

चलना, फिरना, उठना, बैठना

दो पैरों के टखने दो हैं

एक शरीर में कितने दो हैं


पैरों के नीचे दो तलवे हैं

भागूं जिनसे एड़ियाँ दो हैं

बंद हो तो मुट्ठी हो जाये

खोलू गर हथेलियाँ दो हैं

एक शरीर में कितने दो हैं


अरे, भूल गया था, मार तमाचा

मेरे मुंह पे गाल भी दो हैं

दोनों पहलू झांक के देखो

झांकने के भी बगलें दो हैं

एक शरीर में कितने दो हैं


कितने सारे  दो हैं फिर भी

इक ही दिल है, इक ही जान है

एक ही आकाश और एक ही सूरज,

इक जमीं, एक हिन्दुस्तां है।


— गुलज़ार

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